Saturday, 4 November 2017

चरित्रवान श्रेष्ठ

Press question mark to see available shortcut keys 11 Awes NIRAJ Public Nov 15, 2015  ज्ञान और चरित्र राजा भोज के दरबार में एक अत्यंत ज्ञानी महात्मा पधारे ।राजा के अनुरोध पर उन्होंने प्रजा के हितार्थ सात दिनों तक प्रवचन किया। उनके उपदेश सुनकर सभी बेहद खुश और संतुष्ट हुए। राजा भी बहुत प्रभावित हुआ। उसने दक्षिणा स्वरूप महात्मा को ढेरों मुद्राएं दी और फिर आने का निमंत्रण देकर आदरपूर्वक विदा किया। चलते समय राजा ने महात्मा से पूछा कि इस दुनिया में ब्रह्मज्ञानी श्रेष्ठ है या चरित्रवान। महात्मा ने चरित्रवान को श्रेष्ठ बताया, लेकिन राजा इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुआ। उसे लगा कि अपने उच्च ज्ञान की वजह से ही महात्मा ने इतना आदर और सम्मान पाया ।महात्मा इस प्रश्न का समाधान फिर कभी करने का आश्वासन देकर विदा हुए। कुछ दिनों बाद राज दरबार में एक चोर लाया गया। उस पर एक मुद्रा चुराने का आरोप था। जब अपराधी को सामने लाया गया, तो राजा उसे पहचान कर दंग रह गया यह तो वही महात्मा थे, जिन्होंने पिछले दिनों सबको धर्म और जीवन का मर्म समझाया था। राजा को आश्चर्यचकित देखकर चोर के रूप में पकड़े गए महात्मा ने मुस्करा कर कहा, “हे राजन! मैं आज भी पूर्व की भांति ही गुणी और ज्ञानवान पंडित हूं। किंतु लालच और चोरी से चरित्रहीन माना जाऊंगा और अब तुम्हारे दंड का भागी हूं।” राजा को महात्मा के कथन का मर्म समझ में आ गया कि किस तरह चरित्र का दर्जा ज्ञान से ऊपर है ।राजा को यह समझाने के लिए ही महात्मा ने चोर का स्वांग भरा था। मानव जीवन में ज्ञान से चरित्र का दर्जा सदा श्रेष्ठ माना गया है। Translate 35 plus ones 35 3 comments 3 15 shares 15 Shared publicly•View activity Santosh Kumar +1 Verinacepostmyfrinds Nov 15, 2015 Narendra Pandey (Narendra) +1 Nice information Nov 15, 2015 Somkant Agnihotri +1 Very nice Nov 17, 2015 Add a comment...

No comments:

Post a Comment