guru वेदोक्त पंचायतन पूजा  makawanavinod 4 years ago Advertisements  किसी प्रकार की मूर्तिपूजा न करना किन्तु ‘मूर्तिमान्’ जो नीचे कहेंगे उनकी पूजा अर्थात् सत्कार करना चाहिए। सच्ची पंचायतन और वेदोक्त मूर्तिपूजा है वह सुनो- प्रथम माता जो मूर्त्तिमती पूजनीय देवता, अर्थात् सन्तानों को चाहिए कि तन-मन-धन से सेवा करके माता को प्रसन्न रखना, हिंसा अर्थात् ताड़ना कभी न करना। दूसरा पिता सत्कर्त्तव्य देव। उसकी भी माता के समान सेवा करनी। तीसरा आचार्य जो विद्या का देनेवाला है उसकी तन-मन-धन से सेवा करनी। चौथा अतिथि जो विद्वान्, धर्मिक, निष्कपटी, सब की उन्नति चाहनेवाला जगत् में भ्रमण करता हुआ सत्य उपदेश से सबको सुखी करता है उसकी सेवा करें। पांचवा स्त्री के लिए पति और पुरुष के लिए स्व-पत्नी पूजनीय है। ये पांच मूर्त्तिमान् देव जिनके संग से मनुष्य देह की उत्पत्ति, पालन, सत्यशिक्षा, विद्या और सत्योपदेश कर प्राप्ति होती है ये ही परमेश्वर को प्राप्ति होने की सीढ़ियां हैं। इनकी सेवा न करके जो पाषाणादि मूर्त्ति पूजते हैं वे अतीव पामर, नरकगामी तथा वेदविरोधी हैं। -महर्षि दयानन्द सरस्वती Advertisements  Categories: Uncategorized Leave a Comment guru Blog at WordPress.com. Back to top
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