ⓘ Optimized 2 hours agoView original http://www.gyanipandit.com/tulsidas-in-hindi/  Home Biography Biography तुलसीदास जी का जीवन परिचय | Biography of Tulsidas in Hindi By Gyani Pandit - June 25, 2015 तुलसीदास – Tulsidas biography Tulsidas – तुलसीदास साधारणतः गोस्वामी तुलसीदास के नाम से भी जाने जाते है। वे एक हिन्दू कवी-संत, संशोधक और जगद्गुरु रामानंदाचार्य के कुल के रामानंदी सम्प्रदाय के दर्शनशास्त्री और भगवान श्री राम के भक्त थे। तुलसीदास जी अपने प्रसिद्ध दोहों और कविताओ के लिये जाने जाते है और साथ ही अपने द्वारा लिखित महाकाव्य रामचरितमानस के लिये वे पुरे भारत में लोकप्रिय है। रामचरितमानस संस्कृत में रचित रामायण में राम के जीवन की देशी भाषा में की गयी अवधि है।   तुलसीदास जी का जीवन परिचय – Biography of Tulsidas in Hindi पूरा नाम – गोस्वामी तुलसीदास जन्म – सवंत 1589 पिता – आत्माराम माता – हुलसी शिक्षा – बचपन से ही वेद, पुराण एवं उपनिषदों की शिक्षा मिली थी। विवाह – रत्नावली के साथ। by  She Dropped 20 Kg In 2 Weeks!!! Amazing! How About You?   My Weight Was 85 Kg! I Was Losing 3 Kg Of Fat Per Day!  बस १ कप सुबह में पियें - हर दिन कम होगा १ किलो अधिक वजन!  I lost weight staying at home! 23 kg in 14 days! जन्म के समय इनके मुह में पुरे दांत थे, अंत: अशुभ मानकर माता पिता द्वारा त्याग दिये जाने के कारण संत नरहरिदास ने काशी में उनका पालन पोषण किया था। ऐसा कहा जाता है की रत्नावली के प्रेरणा से घर से विरक्त होकर तीर्थ के लिए निकल पडे और तन – मन से भगवान राम की भक्ति में लीन हो गए। उनके द्वारा लिखा गया ‘रामचरितमानस’ हिंदू धर्म की रचना है और उसे घर – घर में आदर प्राप्त हुआ है। तुलसीदास ने अपने जीवन और कार्यो के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध करवाई है। बाद में 19 वी शताब्दी में प्राचीन भारतीय सूत्रों के अनुसार तुलसीदास के जीवन को भक्तामल में बताया गया था जिसकी रचना नाभादास ने की थी जिसमे उनके जीवनकाल को 1583 से 1639 के बीच बताया गया था। इसके बाद 1712 में भक्तिकाल पर टिपण्णी करते हुए प्रियादास ने भक्तिरसबोधिनी की रचना की। नाभादास ने भी तुलसीदास पर टिपण्णी की थी और तुलसीदास पर उन्होंने 6 लाइन का एक छंद भी लिखा था, जिसमे उन्होंने तुलसीदास को वाल्मीकि का पुनर्जन्म बताया था। प्रियादास ने तुलसीदास की मृत्यु के तक़रीबन 100 साल बाद उनपर छंद लिखे थे और तुलसीदास के जीवन के अनुभवों को छंदों के माध्यम से उजागर किया था। 1920 के समय में तुलसीदास की दो और प्राचीन जीवनी प्रकाशित की गयी जो मनुस्मृति पर आधारित थी। तुलसीदास की प्रशंसा करते हुए लोग उन्हें वाल्मीकि का पुनर्जन्म कहते थे, जिन्होंने संस्कृत भाषा में वास्तविक रामायण की रचना की थी। इसके साथ ही उन्हें हनुमान चालीसा का रचयिता भी कहा जाता है, जो हनुमान पर आधारित एक भक्ति गीत है। तुलसीदास ने अपने जीवन का ज्यादातर समय वाराणसी में ही बिताया। गंगा नदी के किनारे पर बसे तुलसी घाट का नाम उन्ही के नाम पर रखा गया था। उन्होंने वाराणसी में संकटमोचन मंदिर की स्थापना की थी, जो हनुमान का ही मंदिर है, लोगो का मानना है की तुलसीदास ने उसी जगह पर भगवान हनुमान के वास्तविक दर्शन किये थे। तुलसीदास ने ही रामलीला के नाटको की शुरुवात की थी। तुलसीदास को हिंदी, भारतीय और वैश्विक साहित्य का एक महान कवी कहा जाता है। तुलसीदास का और उनके कार्यो का प्रभाव हमें कला, संस्कृति और भारतीय समाज में दिखाई देता है, बहुत सी देसी भाषाओ, रामलीला के नाटको, हिन्दुस्तानी क्लासिकल संगीत, लोकप्रिय संगीत और टीवी कार्यक्रमों में हमें तुलसीदास की छवि और उनके कार्य का प्रभाव दिखाई देता है। तुलसीदास कार्य – Tulsidas literary works तुलसीदास द्वारा रचित 12 रचनाये काफी लोकप्रिय है, जिनमे से 6 उनकी मुख्य रचनाये है और 6 छोटी रचनाये है। भाषा के आधार पर उन्हें दो समूहों में विभाजित किया गया है – अवधी कार्य – रामचरितमानस, रामलाल नहछू, बरवाई रामायण, पार्वती मंगल, जानकी मंगल और रामाज्ञा प्रश्न। ब्रज कार्य – कृष्णा गीतावली, गीतावली, साहित्य रत्न, दोहावली, वैराग्य संदीपनी और विनय पत्रिका। इन 12 रचनाओ के अलावा तुलसीदास द्वारा रचित चार और रचनाये काफी प्रसिद्ध है जिनमे मुख्य रूप से हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक, हनुमान बहुक और तुलसी सतसाई शामिल है। भारत में समय-समय पर धर्म, विज्ञान एवं साहित्य के क्षेत्र में महान विद्वानों और साहित्यकारों ने जन्म लिया है। तुलसीदास उन्ही में से एक थे। आज तक हिंदी साहित्य जगत में उनकी जोड़ का दूसरा कवी नही हुआ जो पुरे भारत में अपने साहित्य से इतना प्रभाव छोड़ पाया हो। तुलसीदास का जीवन हिंदी साहित्य में सूरज के समान ही रहा है। जिनकी किरणों ने केवल हिन्दू समाज ही नही बल्कि पुरे विश्व को प्रकाशित किया है। तुलसीदास ने मानव समाज के उत्थान हेतु लोक मर्यादा की आवश्यकता को महसूस किया था, इसलिए उन्होंने ‘रामचरितमानस’ में राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में प्रस्तुत किया और राम, लक्ष्मण, सीता, भारत, हनुमान आदी के रूप में ऐसे आदर्श चरित्रों की कल्पना की है जो जनमानस का सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे। ग्रंथ सम्पति: रामचरितमानस – Ram Charit Manas रामलीला नहछु वैराग्य संदीपनि बरवै रामायण – Tulsidas Ramayana पार्वती मंगल जानकी मंगल रामाज्ञा दोहावली – Tulsidas Ke Dohe कवितावली गीतावली कृष्ण गीतावली विनयपत्रिका – Vinay Patrika by Tulsidas in Hindi एवं ‘हनुमान चालीसा’ आदी। Hanuman Chalisa Tulsidas मृत्यु – संवत 1680 श्रावण शुक्ला सप्तमी के दिन वो स्वर्ग सिधार गये पर भारतीय जनमानस में वो सदैव जीवित रहेंगे। और अधिक लेख: तुलसीदास जी के दोहे हिंदी अर्थ सहित कबीर के दोहे – Kabir Ke Dohe Surdas Biography Kalidas Biography Kabir das biography Note: आपके पास About Tulsidas in Hindi मैं और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे। Note: For more articles like “Tulsidas in Hindi” & more essay, paragraph, Nibandh in Hindi, Kavita for any class students, Also More New Article please download – Gyanipandit free android app. tweet Previous article Rani Laxmi Bai in Hindi | महारानी लक्ष्मीबाई का इतिहास Next article तानसेन जीवन का परिचय | Biography of Tansen in Hindi  Gyani Pandit GyaniPandit.com Best Hindi Website For Motivational And Educational Article... 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Reply  chandra prakash dwivedi August 2, 2017 at 11:06 am Baba tulsi das ji ne kabhi kisi ratnavali se vivah nahi kiya tha yah galat tathya hai ki ratnavali unki patni thi Reply  jairam July 5, 2017 at 2:41 pm Tulsidas Ratnawali Se virakt hone per fir dubara mile Reply  प्रभाकर मिश्रा April 2, 2017 at 11:23 am हरि बोल Reply  Pankaj December 24, 2016 at 1:53 pm Tulsidas ka name Goswami kaise hua Reply  जगदीश काला August 10, 2016 at 10:56 am तुलसीदास के परम् प्रिय मित्र राजा टोडरमल का भी उल्लेख इनके जीवन परिचय में होना चाहिए जिन्होने तुलसीदास की प्रथम रचना रामचरित मानस की सुरक्षा की थी । Reply LEAVE A REPLY  Comment:  Name:*  Email:*  Website: Post Comment FREE Email Subscription Email Subscription Subscribe  Your email here सोशल मिडिया पर ज्ञानीपण्डित से जुड़ें 65,846Fans LIKE 137,412Followers FOLLOW 696Followers FOLLOW 14,685Subscribers SUBSCRIBE EDITOR PICKS  परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ ख़ास टिप्स | Exam Preparation... 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